हार मान लेना हमारी फ़ितरत में नही
खसलत है हर शरह का सामना करना
बस मुश्किल सा हो गया है आजकल
कमज़ोरी और ताक़त में फरक करना
उन्हे ना चाहना हमारी फ़ितरत में नही
उन्हे ना चाहना हमारी फ़ितरत में नही
खसलत है उन आँखों की इबादत करना
बस मुश्किल सा हो गया है आजकल
मोहब्बत और नफ़रत में फरक करना
खसलत = habit ;
शरह = circumstances
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