क्यूँ शुक्र
फरमाते
रहे हमेशा की वो
मेरे हैं
उन्होने कहाँ हम पर ऐसी इनायत
करी
थी
क्यूँ तरसते रहे यूँ उनका साथ पाने
के लिए
उन्हे तो हमारे वजूद की पहचान ही
कहाँ थी
क्यूँ अपने प्यार का यकीन दिलाते चले
गये
उनकी शुरू से इस हक़ीक़त से मुलाक़ात थी
क्यूँ परेशान थे की उन्हे हम पर
ऐतबार नही
उन्हे बस एक
वजह-ए-बेवफ़ाई की तलाश थी
No comments:
Post a Comment