कुछ
तो रगों में जोश शुरू से ही था
कुछ
ज़माने के दस्तूर ने सीखा दिया
काश
हमें भी
किसी ने रब माना
होता
बस
इसी कमी
ने हमें रक़ीब
बना दिया
कुछ तो नशा फ़ितरत में शुरू से ही था
कुछ तो नशा फ़ितरत में शुरू से ही था
कुछ
यारों की सोहबत ने सीखा दिया
काश
हमें कोई अपनी
आँखों से पिलाता
बस
इसी चाह ने हमें
शराबी
बना दिया
कुछ तो शायराना मिज़ाज शुरू से ही था
कुछ तो शायराना मिज़ाज शुरू से ही था
कुछ
ज़िंदगी की लहरों
ने
सीखा दिया
काश
किसी से हाल-ए-दिल बयान कर पाते
बस
इसी ग़ुरबत ने हमें
शायर
बना दिया
रक़ीब = adversary ; ग़ुरबत = poverty ; मिज़ाज = attitude
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