अपनी
किस्मत पर
क्या कहें हम
उसकी
इनायत का शुक्र अदा करें
या
फिर खुदा से
फर्याद करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी का
क्या करें हम
बदलते
हालातों पर क्या कहें हम
मुफ़ीद
वक़्त को ज़िक्र-ए-आम
करें
या
ग़ुरबतों की दास्तान करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी का
क्या करें हम
अजीब
ज़माने पर क्या कहें
हम
दोस्तों
की रहमत को सलाम करें
या
दुश्मनों की शिकायत करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी का
क्या करें हम
तबदील
रिश्तों पर क्या कहें
हम
किसी
की मोहब्बत पर फक्र करें
या किसी
फरेब का सब्र करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी का
क्या करें हम
इनायत = blessings
; फर्याद
= to
ask
; तंज़-ए-ज़िंदगी
= irony
of life ; मुफ़ीद = favourable
ग़ुरबतों
= poverty
; रहमत = obligations ; तबदील = changed ;
फरेब =
betrayal
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