Friday, 11 October 2013

अपनी किस्मत पर क्या कहें हम
उसकी इनायत का शुक्र अदा करें
या फिर  खुदा से फर्याद करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी  का क्या करें हम
 
बदलते हालातों पर क्या कहें  हम
मुफ़ीद वक़्त  को ज़िक्र-ए-आम करें
या ग़ुरबतों की दास्तान करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी  का क्या करें हम
 
अजीब ज़माने पर क्या कहें  हम
दोस्तों की रहमत को सलाम करें
या दुश्मनों की शिकायत करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी  का क्या करें हम
 
तबदील रिश्तों पर क्या कहें  हम
किसी की मोहब्बत पर फक्र करें
या  किसी फरेब का सब्र करें हम
तंज़-ए-ज़िंदगी  का क्या करें हम
 
इनायत = blessings ;    फर्याद  = to ask ;    तंज़-ए-ज़िंदगी = irony of life ;    मुफ़ीद = favourable
ग़ुरबतों = poverty ;     रहमत = obligations ;    तबदील = changed ;    फरेब = betrayal
 

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