जिस
हसीन इश्क़ को पलकों पे नवाज़ा था कभी
वो
तो फरेब-ए-दिल्लगी सा दिल में उतर आया
जिस
को हर नज़र से बचाने की चाहत थी कभी
वो
अज़ीज़-ए-महबूब तो बाज़ार में
उतर आया
फरेब-ए-दिल्लगी = harsh betrayal ; अज़ीज़-ए-महबूब = precious lover
फरेब-ए-दिल्लगी = harsh betrayal ; अज़ीज़-ए-महबूब = precious lover
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