Thursday, 10 October 2013

ख्वाहिश करी की आज कुछ रोमानी करें
क्यूँ नही फिर खुश होने की कोशिश करें
हमने सोचा एक बार उनके दिल की करें
आज सिर्फ़ अपने माशूक़ को दिलशाद करें
 
फ़िज़ा निहायत ही ख़ुशगवार हो चली थी
आरज़ू थी लम्हों को किसी तरह क़ैद करें
अक्सर शिकायत रही है हमारी बेरूख़ी से
इरादा किया आज तमाम हसरतें पूरी करें
 
काश हमारे दिल को भी कोई समझा होता
इंतज़ार रह गया की हाल-ए-दिल बयान करें
कहने को तो वो हर पल मेरे आगोश में थे
पर मुस्तक़िल खामोशी को कैसे क़ुबूल करें
 
मुश्किल है बड़ा वक़्त को मुफ़ीद रख पाना
खुद की ख्वाइशों को कितना भी फ़ना करें
क्या हुआ गर कोई हक़ीक़त वुजूद पे भारी है
क्यूँ ना हम एक बार फिर यही कोशिश करें
 
रोमानी = romantic ;     दिलशाद = happy ;   मुस्तक़िल = permanent
मुफ़ीद = favourable;   फ़ना = suppress ;    हक़ीक़त = fact ;    वुजूद = existence
 

No comments:

Post a Comment