ख्वाहिश
करी
की आज
कुछ रोमानी
करें
क्यूँ
नही फिर
खुश होने की कोशिश करें
हमने
सोचा एक बार उनके दिल की करें
आज
सिर्फ़ अपने माशूक़ को दिलशाद
करें
फ़िज़ा
निहायत ही ख़ुशगवार हो चली थी
आरज़ू
थी
लम्हों को किसी तरह क़ैद करें
अक्सर
शिकायत
रही है हमारी बेरूख़ी से
इरादा
किया आज तमाम हसरतें पूरी करें
काश
हमारे
दिल को भी
कोई समझा होता
इंतज़ार
रह
गया की
हाल-ए-दिल बयान
करें
कहने
को तो वो हर पल मेरे आगोश में थे
पर
मुस्तक़िल
खामोशी को
कैसे क़ुबूल करें
मुश्किल
है
बड़ा वक़्त को मुफ़ीद रख पाना
खुद
की ख्वाइशों
को कितना भी फ़ना करें
क्या
हुआ गर
कोई हक़ीक़त वुजूद
पे भारी है
क्यूँ
ना हम
एक बार फिर यही कोशिश
करें
रोमानी = romantic ; दिलशाद = happy ; मुस्तक़िल
= permanent
मुफ़ीद = favourable; फ़ना = suppress ; हक़ीक़त = fact ; वुजूद = existence
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