जब
होगी माज़ी
की तरफ नज़र
जब
होगी किसी अपने
की गरज़
जब
चाहेंगे हाल-ए-दिल सुनाना
हम
उन्हे बहुत याद
आएँगे
जब
खोजेंगे आगोश में उलफत
जब
भी नाकाफ़ी होगा
सुकून
जब
होगी चाहत
किसी वफ़ा की
हम
उन्हे बहुत याद आएँगे
जब
होगा ज़ख़्मी दिल-ए-बेगुनाह
जब
खुद
समझेंगे दर्द-ए-बेवफ़ाई
जब
होगी
फ़ना
कोशिश-ए-अफ्सोस
हम
उन्हे बहुत याद आएँगे
जब
करेंगे याद इस दीवानगी को
जब
चलेगा ज़िकर मिसाल-ए-इश्क़
जब
ना होगी
क़ुरबान यह आशिक़ी
हम
उन्हे बहुत याद
आएँगे
माज़ी = past ; गरज़
= need
; उलफत = love;
नाकाफ़ी
= insufficient
सुकून = peace ; वफ़ा = loyalty; बेगुनाह = innocent ; बेवफ़ाई = betrayal
मिसाल = example ; क़ुरबान आशिक़ी = devoted love
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